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15 august essay in marathi language

The Marathi language television industry was started in India in 1984. Note: Paper A will not be compulsory for candidates hailing from the States of Arunachal Pradesh, Manipur, Meghalaya, Mizoram, Nagaland and Sikkim. So this special occasion many people are finding 15 August Independence Day Speech In Marathi, if you guys are finding same then you are in perfect place on the Internet.

15 august essay in marathi language

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For the Language medium/ literature of languages, the scripts to be used by the candidates will be as under:— Note: For Santhali language, question paper will beprinted in Devanagari script; but candidates will be free to answer either in Devanagari script or in Olchiki. Various dedicated categories like news and movies have been added and have considerably expanded the horizon of Marathi TV entertainment.

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  • आजादी कहें या स्वतंत्रता ये ऐसा शब्द है जिसमें पूरा आसमान समाया है। आजादी एक स्वाभाविक भाव है या यूँ कहें कि आजादी की चाहत मनुष्य को ही नहीं जीव-जन्तु और वनस्पतियों में भी होती है। सदियों से भारत अंग्रेजों की दासता में था, उनके अत्याचार से जन-जन त्रस्त था। खुली फिजा में सांस लेने को बेचैन भारत में आजादी का पहला बिगुल 1857 में बजा किन्तु कुछ कारणों से हम गुलामी के बंधन से मुक्त नही हो सके। वास्तव में आजादी का संघर्ष तब अधिक हो गया जब बाल गंगाधर तिलक ने कहा कि “स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है”। अनेक क्रांतिकारियों और देशभक्तों के प्रयास तथा बलिदान से आजादी की गौरव गाथा लिखी गई है। यदि बीज को भी धरती में दबा दें तो वो धूप तथा हवा की चाहत में धरती से बाहर आ जाता है क्योंकि स्वतंत्रता जीवन का वरदान है। व्यक्ति को पराधीनता में चाहे कितना भी सुख प्राप्त हो किन्तु उसे वो आन्नद नही मिलता जो स्वतंत्रता में कष्ट उठाने पर भी मिल जाता है। तभी तो कहा गया है कि पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं। जिस देश में चंद्रशेखर, भगत सिंह, राजगुरू, सुभाष चन्द्र, खुदिराम बोस, रामप्रसाद बिस्मिल जैसे क्रान्तिकारी तथा गाँधी, तिलक, पटेल, नेहरु, जैसे देशभकत मौजूद हों उस देश को गुलाम कौन रख सकता था। आखिर देशभक्तों के महत्वपूर्ण योगदान से 14 अगस्त की अर्धरात्री को अंग्रेजों की दासता एवं अत्याचार से हमें आजादी प्राप्त हुई थी। ये आजादी अमूल्य है क्योंकि इस आजादी में हमारे असंख्य भाई-बन्धुओं का संघर्ष, त्याग तथा बलिदान समाहित है। ये आजादी हमें उपहार में नही मिली है। वंदे मातरम् और इंकलाब जिंदाबाद की गर्जना करते हुए अनेक वीर देशभक्त फांसी के फंदे पर झूल गए। 13 अप्रैल 1919 को जलियाँवाला हत्याकांड, वो रक्त रंजित भूमि आज भी देश-भक्त नर-नारियों के बलिदान की गवाही दे रही है। आजादी अपने साथ कई जिम्मेदारियां भी लाती है, हम सभी को जिसका ईमानदारी से निर्वाह करना चाहिए किन्तु क्या आज हम 66 वर्षों बाद भी आजादी की वास्तिवकता को समझकर उसका सम्मान कर रहे है?


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    Although earlier confined to a half an hour slot in the national television Doordarshan, the industry has now expanded with many commercial TV channels currently on air. आलम तो ये है कि यदि स्कूलों तथा सरकारी दफ्तरों में 15 अगस्त न मनाया जाए और उस दिन छुट्टी न की जाए तो लोगों को याद भी न रहे कि स्वतंत्रता दिवस हमारा राष्ट्रीय त्योहार है जो हमारी जिंदगी के सबसे अहम् दिनों में से एक है । एक सर्वे के अनुसार ये पता चला कि आज के युवा को स्वतंत्रता के बारे में सबसे ज्यादा जानकारी फिल्मों के माध्यम से मिलती है और दूसरे नम्बर पर स्कूल की किताबों से जिसे सिर्फ मनोरंजन या जानकारी ही समझता है। उसकी अहमियत को समझने में सक्षम नही है। ट्विटर और फेसबुक पर खुद को अपडेट करके और आर्थिक आजादी को ही वास्तिक आजादी समझ रहा है। वेलेंटाइन डे को आज हम जिस खुली फिजा में सांस ले रहे हैं वो हमारे पूर्वजों के बलिदान और त्याग का परिणाम है। हमारी नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि मुश्किलों से मिली आजादी की रुह को समझें। आजादी के दिन तिरंगे के रंगो का अनोखा अनुभव महसूस करें इस पर्व को भी आजद भारत के जन्मदिवस के रूप में पूरे दिल से उत्साह के साथ मनाएं। स्वतंत्रता का मतलब केवल सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता न होकर एक वादे का भी निर्वाह करना है कि हम अपने देश को विकास की ऊँचाइयों तक ले जायेंगें। भारत की गरिमा और सम्मान को सदैव अपने से बढकर समझेगें। रविन्द्र नाथ टैगोर की कविताओं से कलम को विराम देते हैं। हो चित्त जहाँ भय-शून्य, माथ हो उन्नत हो ज्ञान जहाँ पर मुक्त, खुला यह जग हो घर की दीवारें बने न कोई कारा हो जहाँ सत्य ही स्रोत सभी शब्दों का हो लगन ठीक से ही सब कुछ करने की हों नहीं रूढ़ियाँ रचती कोई मरुथल पाये न सूखने इस विवेक की धारा हो सदा विचारों ,कर्मों की गतो फलती बातें हों सारी सोची और विचारी हे पिता मुक्त वह स्वर्ग रचाओ हममें बस उसी स्वर्ग में जागे देश हमारा। अनिता जी दृष्टिबाधित छात्रों के लिए सराहनीय कार्य कर रही हैं। उन्होंने अपनी आवाज़ में 100 educational You Tube videos post किये हैं, जिन्हें 200000 से अधिक बार देखा जा चुका है। आप इनके बारे में बताकर blind students की मदद कर सकते हैं। सामान्य विद्यार्थी भी जो Bank या Civil Services की तैयारी कर रहे हैं वो भी इन Audios का लाभ ले सकते है।You may visit her blog : We are grateful to Anita Ji for sharing this inspirational Indian Independence Essay in Hindi. You may use this essay as 15th August Independence Day Speech in Hindi अनिता जी के बारे में और अधिक जानने के लिए यहाँ क्लिक करें या उनके ब्लॉग पर विजिट करें.

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    The aim of the paper is to test the candidates’s ability to read and understand serious discursive prose, and to express his ideas clearly and correctly, in English and Indian Language concerned. (UPSC says, the papers on Essay, General Studies and Optional Subject of only such candidates will be taken cognizance who attain 30% marks in Indian Language and 25% marks in English as minimum qualifying standards in these qualifying papers.) The pattern of questions in the qualifying Indian Language Paper would be broadly as follows: (i) Comprehension of given passages. (iv) Short Essay (v) Translation from English to the Indian language and vice‐versa. ENGLISH ESSAY A TRUE FRIEND This time we all are going to celebrate 70 anniversary of our Independence day.


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